ग्यारस की जानकारी और तिथि के बारे में देखिये

ग्यारस का विशेष महत्व माना जाता है। हर महीने कृष्ण और शुक्ल में एक-एक तिथि आती है, इसलिए वर्ष भर में कुल 24 एकादशी व्रत होते हैं। जब अधिक मास पड़ता है तो इनकी संख्या बढ़ भी सकती है। ग्यारस का दिन भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है और इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान श्रीहरि की पूजा-अर्चना करते हैं।

मान्यता है कि ग्यारस का व्रत करने से मनुष्य के पापों का नाश होता है, मानसिक शांति प्राप्त होती है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा मिलती है। धार्मिक ग्रंथों में एकादशी को सभी व्रतों में श्रेष्ठ बताया गया है।

जून 2026 में ग्यारस कब-कब है?

जून 2026 में दो प्रमुख एकादशी व्रत पड़ रहे हैं:

1. परम ग्यारस

तिथि: 11 जून 2026, गुरुवार

यह ग्यारस अधिक मास में पड़ने वाली विशेष ग्यारस मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार परम ग्यारस का व्रत करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति, सुख-समृद्धि और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

2. निर्जला ग्यारस

तिथि: 25 जून 2026, गुरुवार

निर्जला ग्यारस को वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन बिना जल ग्रहण किए व्रत रखने की परंपरा है। मान्यता है कि जो व्यक्ति सभी यह व्रत नहीं कर पाता, वह यदि श्रद्धापूर्वक निर्जला का व्रत रखे तो उसे सभी एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त होता है।

ग्यारस क्या होती है?

पंचांग के अनुसार प्रत्येक पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को ग्यारस कहा जाता है। ग्यारहवीं तिथि यह तिथि भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।

ग्यारस का धार्मिक महत्व

इसका महत्व केवल व्रत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम, साधना और आध्यात्मिक उन्नति का भी दिन माना जाता है।

ग्यारस के प्रमुख धार्मिक महत्व निम्नलिखित हैं:

  • भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
  • पापों का नाश और पुण्य की प्राप्ति होती है।
  • मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
  • परिवार में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है।
  • मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
  • नकारात्मक विचारों और बुरी आदतों से मुक्ति मिलती है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार यह व्रत करने वाला व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से अधिक जागरूक और संतुलित बनता है।

ग्यारस व्रत की पूजा विधि

एकादशी के दिन पूजा-विधि को विशेष महत्व दिया गया है। श्रद्धालु निम्न प्रकार से पूजा कर सकते हैं:

1. प्रातः स्नान करें

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

2. व्रत का संकल्प लें

भगवान विष्णु के समक्ष बैठकर व्रत रखने का संकल्प करें।

3. पूजा स्थल तैयार करें

भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र को स्वच्छ स्थान पर स्थापित करें।

4. पूजा करें

भगवान विष्णु को:

  • पीले फूल
  • तुलसी दल
  • धूप
  • दीपक
  • चंदन
  • फल

अर्पित करें।

व्रत में क्या खाना चाहिए?

व्रत रखने वाले लोग सामान्य अन्न का सेवन नहीं करते।

व्रत में खाए जाने वाले पदार्थ:

  • फल
  • दूध
  • दही
  • मखाना
  • साबूदाना

क्या नहीं करना चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:

  • क्रोध और विवाद से बचना चाहिए।
  • झूठ नहीं बोलना चाहिए।
  • नशा और तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए।
  • किसी का अपमान नहीं करना चाहिए।

ग्यारस के दिन दान का महत्व

इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अनुसार निम्न वस्तुओं का दान कर सकते हैं:

  • जल
  • अन्न
  • वस्त्र
  • फल
  • दक्षिणा

जून का महीना धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस महीने 11 जून 2026 को परम ग्यारस तथा 25 जून 2026 को निर्जला ग्यारस मनाई जाएगी।